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नक्षत्र और निवास

 नक्षत्र और निवास
 
• आजकल समय और परिस्तिथियाँ ऐसे हो गए हैं कि - अपना घर लेना और उसे अपनी इच्छा अनुसार बनाना आसान काम नहीं है । मत्स्य-पुराण, भविष्य-पुराण और स्कन्द-पुराण में वास्तु विषयक सामग्री मिलती है । परंतु महानगरों व् नगरों में सभी को वास्तु का लाभ मिल जाये, ऐसा असंभव सा होता जा रहा है । अथवा समस्या होता जा रहा है । शहरों की स्थिति ऐसी हो गई है कि - जहाँ जगह मिले निवास कर लो । ऐसे में वास्तु-सिद्धांत कैसे अपनाये जायें । अगर कोई किराये पे रहता है तो ये और भी जटील समस्या हो जाती है । व्यक्ति सदा इस बात से चिंतित रहता है कि - मेरा घर, मेरे लिये शुभ है कि नहीं । 
लेकिन हमारे शास्त्रों ने, ग्रंथो ने और विभिन्न पुस्तकों ने हमें कई उपाय सुझाएं हैं । जैसे एक ये है कि - जिस नक्षत्र में आप जन्मे है उससे संबंधित सामग्री से घर की सजावट करें तो आपका घर आपके लिये बहुत अनुकूल हो सकता है । कई दोषों का निवारण भी हो सकता है । 
जैसे - अगर आप अश्विनी, मघा अथवा मुला नक्षत्र में जन्मे है तो ध्यान रखे कि - आप केतु के नक्षत्र में जन्मे हैं । 
घर के पर्दे और बेदशीट्स का रंग धूम्र अथवा मटमैला सा हो तो सार्थक होगा । बैठक में एक ड्रैगन का चित्र अला-बला, जादू-टोने और भूत-प्रेत के डर से रक्षा करेगा । घर में गुलाब अथवा चन्दन की सुगंध फैली हो और चन्दन की लकड़ी की कोई सुन्दर वस्तु हो तो शक्ति मिलती है । बैडरूम में कांसे की कोई प्रतिमा याँ पंच-धातु का कोई आभूषण अवश्य रखें ।लेकिन पहले कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान अवश्य रखें । 
बैडरूम की दीवारों पर ज्यादा कीलें ना ठुकी हो, नहीं तो चैन की नींद मुश्किल हो जाती है । घर का फर्नीचर बहेड़ा, पीपल, बरगद और करंज की लकड़ी से ना बना हो अन्यथा अशांति, क्लेश और प्रेतबाधा तक हो सकती है । बैडरूम में सांप, ड्रैगन के चित्र ना लगायें, ये चित्र यौनजीवन में विसंगतियां लाते हैं । पूर्व दिशा याँ उत्तर दिशा में स्टोर अथवा कबाड़खाना नहीं होना चाहिये । घर में इन दिशाओं में जितना कम भार होगा गृहस्थी उतनी ही सुखपूर्वक चलेगी । पानी का संग्रह उत्तर-पूर्व दिशा में करें । पश्चिम और उत्तर दिशा में सर करके सोने से रोग और अशांति होती है । खिड़कियों के कांच टूटे-फूटे हो तो छोटी-मोटी समस्यायें घर में लगी ही रहती हैं । खिड़कियां घर में अंदर की तरफ खुलती हो तो शुभ होता है ।
वास्तु-शास्त्री खिड़कियों को वास्तु की आँख कहते हैं, ये ज्ञान प्राप्ति का शक्तिशाली माध्यम है ।
उस कमरे में कदापि नहीं सोना चाहिये जिस कमरे की छत ना हो । घर में सीलन ना हो और प्रवेश द्वार का रंग उखड़ा ना हो, ये दरिद्रता और रोग के सूचक माने जाते हैं । घर के मुख्य द्वार के पास कूड़ा-करकट अशुभ फल देता है ।
• आजकल घरों में वार्डरोब बनाने का फैशन है । अगर आप अपने घर में वार्डरोब बना रहे हैं तो इसे दक्षिण याँ पश्चिम में बनाना बेहतर रहेगा । चाहे पूरी दीवार ही क्यों ना घिर जाये । लेकिन अगर ऐसा संभव ना हो तो पूर्व और उत्तर में भी इसे बनाया जा सकता है लेकिन फिर पूरी दीवार नहीं घेरी जानी चाहिये । ईशान-कोण तो खुला रखना ही होगा ।
बहरहाल चलते हैं - नक्षत्रों की ओर ।
अगर आप भरणी, पूर्वा-फाल्गुनी अथवा पूर्व-षाढा नक्षत्र में जन्मे है तो ध्यान रखे - आप शुक्र के नक्षत्र में जन्मे हैं । आपको अपने घर में सफ़ेद याँ फिरोज़ी रंग का इस्तेमाल करना चाहिये । स्फटिक के शो-पीस अथवा सफ़ेद चन्दन की लकड़ी के फ्रेम से जड़ी तस्वीरें आपको सुख प्रदान करेगी । आप अंग्रेजी रंग याँ कम चटकीले रंग भी घर की दीवारों पर लगा सकते हैं । मछली आकार वाले किसी बर्तन में पानी भरकर बैडरूम में रखना आपको बहुत सुख और शान्ति देगा । 
अगर आप कृतिका, उतरा-फाल्गुनी अथवा उतरा-षाढा नक्षत्र में जन्मे हैं तो आप सूर्य के नक्षत्र में जन्मे हैं । हल्क़े गुलाबी रंग अथवा कत्थई रंग का उपयोग आपके घर के लिये शुभ होगा । ताँबे की बनी वस्तुएं आपके घर की सजावट के लिये बहुत शुभ होगी । काले और गहरे नीले रंग का उपयोग ना करें । प्राकृतिक सुंदरता के चित्र और आकर्षक जानवरों के चित्र सजाने से मन को शान्ति मिलती है । रात्रि में सोते समय सिरहाने से लाल-चन्दन याँ एक ताँबे का टुकड़ा अवश्य रखें । 
अगर आप रोहिणी, हस्त अथवा श्रवण नक्षत्र में पैदा हुये हैं तो आप चंद्र के नक्षत्र में पैदा हुये हैं । घर की सजावट में कलाकृतियां और चांदी का उपयोग भावनात्मक सुख देता है । बेडशीट्स और पर्दे, मोती जैसे रंग के हो तो सोने पे सुहागा होगा । घर में चमेली की सुगंध राहत प्रदान करती है । चांदी के शो-पीस और आभूषण उत्तम होंगे । वैसे हल्के पीले रंग का उपयोग भी सुखकारी होगा । 
अगर आपने मृगशिरा, चित्रा अथवा धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लिया है तो आपने मंगल के नक्षत्र में जन्म लिया है । सेनापति मंगल के नक्षत्र में जन्मे लोगों को घर की सजावट के प्रति थोड़ा सतर्क रहना चाहिये । सिन्दूरी और कोका-कोला जैसा रंग आपके घर के लिये शुभ सिद्ध होगा और ताँबे से बनी वस्तुएं सजावट के लिये उत्तम है । नीले और काले रंग का प्रयोग आप ना करें । दीवारों पर वीरतापूर्ण कारनामों के चित्र आपके मन प्रसन्न रख सकते हैं । 
अंत में, फ्लैट याँ घर लेते समय ध्यान रखें कि - उत्तर याँ पूर्व में खिड़कियां अवश्य हो । पूर्व में खिड़कियां ना होने से बच्चों की पढ़ाई और हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है । और उत्तर में खिड़कियां ना होने से आर्थिक व्यवस्था का संतुलन बिगड़ जाता हैं ।
• फैशन और आधुनिकता के चलते लोग घरों में बड़े-बड़े और सुन्दर दर्पण लगाते हैं । ताकि अपनेआपको सजते संवरते देखा जा सके । अपनी सुंदरता का आंकलन किया जा सके और कमी बेशी को दूर किया जा सके । 
ध्यान रखे कि - दर्पण केवल दक्षिण और पश्चिम दिवार पर ही लगाना चाहिये । दर्पण की ऊँचाई ऐसी हो कि - उसमे पैरों का प्रतिबिम्ब ना दिखाई दे । सात फ़ीट की ऊँचाई में नीचे के तीन फ़ीट छोड़कर ऊपर के चार फ़ीट में ही दर्पण लगाया जाना चाहिये । दर्पण की लंबाई-चौड़ाई समान होनी चाहिये । अगर लंबाई की तुलना में चौड़ाई कम हो तो और अच्छा होगा ।
अब नक्षत्रों की बात ।
अगर आप आर्द्रा, स्वाति अथवा शतभिषा नक्षत्र में जन्म लिये हैं । तो आपने राहु के नक्षत्र में जन्म लिया है । कबूतरी रंग, हल्का काला और नीला रंग इस नक्षत्र में जन्मे लोगों को खूब रास आता है । इसके विपरीत पीला और गहरा लाल रंग अशांति उत्पन्न कर देता है । दीवारों पर हिंसक पशुओं के चित्र मानसिक शान्ति भंग कर सकते हैं । स्टीलयुक्त लकड़ी से बना फर्नीचर घर के लिये उत्तम सिद्ध होगा ।
अगर आप पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा-भाद्रपद नामक गुरु बृहस्पति के नक्षत्रों में जन्म लिये है । तो दीवारों पर पीला रंग तथा पीतल से बने शो-पीस आपको शान्ति और समृद्धि दोनों ही देंगे । सुनहरा और पीली आभा लिये सफ़ेद रंग भी आपके लिये उत्तम सिद्ध होगा । दीवारों पर फलों और वनस्पतियों के चित्र आपको राहत देंगे । फूलदान में ताजे फूल रखने से समृद्धि बढ़ती है । घर में स्वर्ण-पात्र और स्वर्ण शो-पीस भी उत्तम सिद्ध होते हैं । बादामी, चिरौंजी और स्वर्ण रंग का भी उपयोग कर सकते हैं । 
अगर आप पुष्य, अनुराधा अथवा उतरा-भाद्रपद नक्षत्र में जन्म लिये हैं तो आप शनि के नक्षत्र में जन्म लिये है । दीवारों पर नीला रंग स्वास्थ और समृद्धि के लिये बहुत अच्छा है । वैसे कबूतरी रंग और आसमानी रंग भी सुखद सिद्ध होगा । सजावट के लिये शुद्ध स्टील अथवा मिश्रीत धातुओं का प्रयोग कर सकते हैं । जामिनुया और बादली रंग का उपयोग दुर्घटनाओं से आपकी रक्षा करेगा । संतो और महापुरुषों की तस्वीरे बैठक में लगाने से सुखद अहसास होता है ।
अगर आप अश्लेषा, ज्येष्ठा अथवा रेवती नक्षत्र में जन्मे हैं तो आप बुध के नक्षत्र में जन्मे हैं । दीवारों पर हरा और हल्का रंग आपको विवादों से बचाता है । दूर्वा-रंग और लकड़ी का अधिक प्रयोग बहुत शुभ होता है । सजावट के लिये हरे-भरे मैदानों के चित्र और विचित्र रंगों के चित्र उत्तम होते हैं । शुभ्र और कत्थई रंगो का उपयोग ना करें ।सजावट में तुम्भी का प्रयोग समृद्धि देता है । 
बहरहाल शयनकक्ष में फूलों का गुलदस्ता अवश्य रखें । लेकिन दूध टपकने वाले फूल-पौधे और कटीले गुलदस्ते ना रखें । इसमें गुलाब के फूलों की मनाही नहीं है । देवमूर्ति और पूजा के उपकरण सजावट के लिये उपयोग ना करें तो अच्छा है । बैडरूम में दवाइयाँ, कटु रस के पत्ते, जुठे बर्तन और झाड़ू नहीं रखने चाहिये । 
संध्या के समय ईशान-कोण में घी का दीपक लगाने से खुशहाली और समृद्धि बढ़ती है । 
 
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